राष्ट्रपति आइज़नहावर ने इस विद्रोह को “आज़ादी की ताक़तों की एक उम्मीद भरी जीत” क़रार दिया।
लेकिन किसके लिए आज़ादी? सच तो यह है कि ईरानियों के लिए इस विद्रोह या बग़ावत का नतीजा, विदेशी वर्चस्व की वापसी और राष्ट्रीय संसाधनों की लूटमार के अलावा कुछ नहीं था।