ईरान के विदेश मंत्रालय ने 25 मार्च 1979 में को औपचारिक रूप से सेंटो से बाहर निकलने का एलान कर दिया। ईरान का कहना था कि यह समझौता, उपनिवेशवाद का हथियार है, जो सिर्फ़ पश्चिमी साम्राज्य के हितों की आपूर्ति करता है। ईरान के निकलने के साथ ही सेंटो समाप्त हो गया और एशिया पर नाटो के वर्चस्व का सपना अधूरा रह गया।